न्यूज डेस्क (RK) : नेपाल में ऐसी बाढ़ पहले नहीं आई थी 21 वीं सदी में बाढ़ की ऐसी विभीषिका लोगों ने नहीं देखी थी। अभी तक 332 लोगों के मरने की पुष्टि हुई है।1000 से अधिक लोग लापता हैं। राहत और बचाव कार्य चल रहा है। भारत सरकार ने बड़ी मात्रा में राहत सामग्री भेजी है। और सहयोग का सिलसिला जारी है। नेपाल के प्रधानमंत्री बलिंद्र शाह ने भारत का शुक्रिया अदा किए हैं। बुधवार को आई यह बाढ़ अप्रत्याशित थी। अभी चारों तरफ मलबा बिछा हुआ है।
नेपाल में बड़ी संख्या में पर्यटक आते हैं। भारत से भी बड़ी संख्या में लोग पूजा करने जा रहे थे। मानसरोवर यात्रा के लिए भारत से बहुत लोग नेपाल गए थे।इस तबाही का जो दृश्य सामने आया है वो दर्द देने वाला है। काठमांडू टाइम्स के अनुसार नेपाल पुलिस ने कन्फर्म किया है कि अभी तक 332 लोगों की मौत हुई है। बीस देशों के पर्यटक या श्रद्धालु इसकी चपेट में गए भारत के सैकड़ों पर्यटक नेपाल में थे। उनके बारे में अभी कोई सूचना नहीं है। भारत सरकार लगातार नेपाल सरकार से संपर्क में है।
मालूम हो कि नेपाल के जिन आठ जिलों से लाशें बरामद की गई हैं, उनके बारे में यह जानकारी मिली है। चितवन में 121, गोरखा में 29,नवलपरासी ईस्ट में 74, धाडिंग में 29, नुवाकोट में 28, तनहुन में 19, रसुवा में 17 और नवलपरासी वेस्ट में 15 लाशें बरामद हुई हैं। जानकारी के अनुसार जलप्रलय में मरने वालों की संख्या 289 बताई गई थी।बाढ़ के बाद से पुलिस और दूसरी सिक्योरिटी एजेंसियां बाढ़ से प्रभावित जिलों में सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन जारी रखे हुए हैं। साथ ही सेना उन इलाकों से परिवारों को निकाल रही हैं जहां अभी बाढ़ का खतरा बना हुआ है।
सरकारी सूत्रों के अनुसार लापता लोगों में बड़ी संख्या उन विदेशियों की है, जो ट्रैकिंग या पवित्र हिंदू धार्मिक स्थल की तीर्थयात्रा के लिए इस क्षेत्र में पहुंचे थे। मरे हुए लोगों की संख्या अलग हो सकती है। इसकी वजह आंकड़े जुटाने के तरीकों, रिपोर्ट किए जाने के समय और उनके सत्यापन में अंतर के साथ-साथ आंकड़े जुटाने वाले अधिकारियों और प्रभावित क्षेत्रों में बचाव अभियान चला रहे दलों के बीच समन्वय की कमी भी है। पीटीआई न्यूज ने विदेश मंत्रालय के हवाले से बताया है कि लापता लोगों में 288 भारतीय नागरिक भी शामिल है। नेपाल पर्यटन बोर्ड ने बृहस्पतिवार को बताया कि 517 विदेशी नागरिक लापता हैं। इनमें से 113 नेपाली पर्यटक, सेना और पुलिस के 85 जवान तथा रसुवा जिले के 161 निवासी और नुवाकोट जिले का एक व्यक्ति शामिल है। यह आंकड़ा औपबंधिक है। इसमें इज़ाफ़ा हो सकता है।
भारत ने नेपाल को इस भयानक आपदा की स्थिति में सहयोग की पेशकश की है। नेपाल ने इसके लिए भारत का शुक्रिया किया है। भारत के लोगों की तलाश जारी है। मालूम हो कि नेपाल तिब्बत सीमा पर स्थित ग्लेशियरके फटने से नेपाल में भयानक तबाही आई है। इस विभीषिका में 30 देश के लोग चपेट में आए हैं। राहत और बचाव कार्य जारी है।मरने वालों की संख्या काफी बढ़ सकती है।














