NEET-2026 परीक्षा
से जुड़े कथित पेपर लीक, मूल्यांकन प्रक्रिया पर उठे सवाल और छात्र आंदोलनों को लेकर झारखंड में गुरुवार को राजनीतिक माहौल गर्म रहा। कांग्रेस और झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने राज्य के विभिन्न जिलों में विरोध-प्रदर्शन करते हुए केंद्र सरकार से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। कई स्थानों पर रैलियां निकाली गईं, विरोध मार्च आयोजित हुए और प्रशासन के माध्यम से राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन भी सौंपे गए। कोडरमा, रामगढ़, गिरिडीह, हजारीबाग, साहिबगंज, पाकुड़ और पूर्वी सिंहभूम सहित कई जिलों में पार्टी कार्यकर्ताओं ने छात्र हितों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि प्रतियोगी परीक्षाओं में सामने आ रही कथित अनियमितताओं से लाखों अभ्यर्थियों का भविष्य प्रभावित हो रहा है और इससे युवाओं का परीक्षा प्रणाली पर विश्वास कमजोर पड़ रहा है रामगढ़ में कांग्रेस नेताओं ने प्रशासन को ज्ञापन सौंपते हुए परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने की मांग की, जबकि पाकुड़ और हजारीबाग में झामुमो कार्यकर्ताओं ने विरोध मार्च निकालकर केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। वहीं जमशेदपुर में कांग्रेस ने उपायुक्त कार्यालय के समक्ष प्रदर्शन कर छात्र आंदोलनों के दौरान कथित पुलिस कार्रवाई पर भी सवाल उठाए और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग दोहराई गिरिडीह और साहिबगंज में भी दोनों दलों के नेताओं ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच आवश्यक है। उनका कहना था कि युवाओं के भविष्य से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है। इन विरोध-प्रदर्शनों के बाद झारखंड में शिक्षा व्यवस्था, प्रतियोगी परीक्षाओं की निष्पक्षता और छात्र हितों को लेकर राजनीतिक बहस और तेज हो गई है। विपक्षी दलों ने संकेत दिए हैं कि यदि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया, तो आने वाले समय में आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जा सकता है।














